उन्होंने कहा कि ममता सरकार एकतरफा राजनीती (अपीज़मेंट पॉलिटिक्स) कर रही है, जिससे हिंदू समाज असुरक्षित महसूस कर रहा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि “जब तक बंगाल में 9% निष्क्रिय हिंदू वोटर घर से निकलकर वोट नहीं डालेंगे, तब तक बदलाव नहीं आएगा। रामराज्य लाना है तो लोकतंत्र का हथियार उठाना होगा।”
पश्चिम बंगाल में हालिया सांप्रदायिक हिंसा के बीच अभिनेता से राजनेता बने मिथुन चक्रवर्ती ने राज्य की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार से राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की है। मिथुन ने कहा कि मुर्शिदाबाद और आसपास के मुस्लिम बहुल इलाकों में जो हालात बने हैं, वे बेहद चिंताजनक और अस्वीकार्य हैं।
वक्फ (संशोधन) अधिनियम के विरोध से भड़की हिंसा
8 से 12 अप्रैल के बीच मुर्शिदाबाद जिले के शमशेरगंज, सुती, धूलियान और जंगीपुर जैसे क्षेत्रों में वक्फ संशोधन अधिनियम के विरोध में बड़े स्तर पर प्रदर्शन हुए, जो बाद में सांप्रदायिक झड़पों में तब्दील हो गए। इस हिंसा में 3 लोगों की मौत, सैकड़ों गिरफ्तारियां, और हजारों लोगों का विस्थापन हुआ। स्थानीय हिंदू व्यापारी समुदाय पर हमले की खबरें भी सामने आईं, जिससे सामाजिक तनाव और गहराता जा रहा है।
"कम से कम चुनावों तक सेना भेजी जाए" – मिथुन चक्रवर्ती
मिथुन ने मीडिया से बात करते हुए कहा: “मैं पहले भी अपील कर चुका हूं और अब फिर केंद्रीय गृह मंत्री से गुजारिश करता हूं कि कम से कम चुनाव तक सेना तैनात की जाए। ताकि निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान हो सके। जब तक अंदर सेना नहीं होगी, तब तक कानून व्यवस्था पर भरोसा नहीं किया जा सकता।” उन्होंने दावा किया कि बंगाल के हिंदू समुदाय विशेषकर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग हिंसा के बाद बेघर हो चुके हैं, और खिचड़ी खाकर किसी तरह गुजर-बसर कर रहे हैं।
टीएमसी सरकार पर सीधा हमला
पूर्व टीएमसी नेता रहे मिथुन ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ममता सरकार "एकतरफा appeasement politics" कर रही है, जिससे हिंदू समाज असुरक्षित महसूस कर रहा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि “जब तक बंगाल में 9% निष्क्रिय हिंदू वोटर घर से निकलकर वोट नहीं डालेंगे, तब तक बदलाव नहीं आएगा। रामराज्य लाना है तो लोकतंत्र का हथियार उठाना होगा।”
राजनीति बनाम संवैधानिक व्यवस्था का टकराव
मिथुन की यह मांग ऐसे वक्त आई है जब पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव नजदीक हैं और सांप्रदायिक घटनाएं सियासी मुद्दा बन चुकी हैं। हालांकि राज्य सरकार ने केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर हिंसा की जांच शुरू कर दी है, लेकिन मिथुन जैसे नेताओं की बयानबाज़ी से मामला और गरमाता दिख रहा है।
समाज के लिए चेतावनी, सरकार के लिए चुनौती
यह मामला केवल राजनीतिक विमर्श तक सीमित नहीं रह सकता। यह राज्य सरकार, केंद्र और आम नागरिक, तीनों के लिए संवेदनशीलता, सजगता और संतुलन की परीक्षा है। जब एक राज्य में एक समुदाय खुद को असुरक्षित और दूसरे समुदाय पर अत्याचार का दोषी ठहरा रहा हो, तो केवल सुरक्षा बल या राजनीतिक बयान समाधान नहीं हो सकते। उन्होंने कहा की ज़रूरत है — विश्वास बहाली, निष्पक्ष जांच और एकजुट सामाजिक पहल की।
Related Items
पाकिस्तान सरकार का एक्स अकाउंट किया गया ब्लॉक
वक्फ संशोधन कानून को बंगाल में लागू नहीं होने दूंगी: ममता बनर्जी
चारा खाया, अब होगी रिकवरी, 28 साल बाद जागी सरकार