पहलगाम आतंकी हमला 2025: आतंक की नई पटकथा

Vishal Singh | विविधा | 104

TRF (The Resistance Front) ने हमले की जिम्मेदारी ली है। उनका कहना है कि कश्मीर में बाहरी लोगों की बसावट को वे जनसांख्यिकीय खतरा मानते हैं। हालिया वर्षों में लगभग 85,000 गैर-स्थानीय लोगों को डोमिसाइल मिला है, जिसे आतंकी संगठन चुनौती के रूप में देखता है।

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के खूबसूरत पहलगाम के बैसरन घाटी में एक भयानक आतंकी हमला हुआ, जिसमें 25 पर्यटकों की जान चली गई और 20 से अधिक घायल हो गए। यह हमला आतंकियों द्वारा सेना की वर्दी पहनकर किया गया, जिससे भ्रम और भय दोनों फैल गया। यह घटना 2019 के पुलवामा हमले के बाद सबसे भीषण मानी जा रही है।

हमले की प्रकृति
चार से छह आतंकी सेना की वर्दी में घाटी पहुंचे और पहले लोगों से नाम पूछे, फिर धार्मिक पहचान के आधार पर उन्हें गोली मार दी। महिलाओं को छोड़ दिया गया, लेकिन एक महिला से कहा गया कि वह प्रधानमंत्री मोदी को बताए कि कश्मीर में क्या हो रहा है। यह एक मनोवैज्ञानिक दबाव और डर फैलाने की रणनीति थी।

मारे गए लोगों की पृष्ठभूमि
हमले में जान गंवाने वालों में महाराष्ट्र, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, गुजरात और केरल के लोग शामिल थे। एक नौसेना अधिकारी और एक इंटेलिजेंस ब्यूरो अधिकारी भी शहीद हुए। दो विदेशी नागरिक – एक नेपाल और एक UAE से – भी मारे गए।

सेना की वर्दी और पुरानी रणनीति
पहलगाम से पहले भी उरी (2016), पठानकोट (2016), और सुंजवां (2018) हमलों में आतंकियों ने सेना की वर्दी का इस्तेमाल किया था। इसका उद्देश्य होता है भ्रम फैलाना और सुरक्षा चेकपॉइंट्स को पार करना।

जिम्मेदारी और मकसद
TRF (The Resistance Front) ने हमले की जिम्मेदारी ली है। उनका कहना है कि कश्मीर में बाहरी लोगों की बसावट को वे जनसांख्यिकीय खतरा मानते हैं। हालिया वर्षों में लगभग 85,000 गैर-स्थानीय लोगों को डोमिसाइल मिला है, जिसे आतंकी संगठन चुनौती के रूप में देखता है।

सरकार की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने घटना की तीखी निंदा की है। अमित शाह ने श्रीनगर का दौरा किया और एनआईए को जांच सौंपी गई है। पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट है। यह हमला केवल हिंसा नहीं बल्कि एक संदेश था – डर, नफरत और अस्थिरता फैलाने का। अब जरूरी है कि इस मानसिकता और नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जाए और घाटी में शांति बहाल हो।