यह भी सामने आया है कि 2006 में छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ला की एक निजी अस्पताल में सर्जरी के दौरान मृत्यु हुई थी, जिसमें नरेंद्र यादव का नाम जुड़ा हुआ है।
मध्य प्रदेश के दमोह जिले में स्थित मिशनरी अस्पताल में कार्यरत फर्जी हृदय रोग विशेषज्ञ नरेंद्र यादव उर्फ नरेंद्र जॉन केम को सोमवार को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि उन्होंने आयुष्मान भारत योजना के तहत सरकारी धन का दुरुपयोग किया, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा।
फर्जी डिग्री और पहचान
नरेंद्र यादव ने खुद को लंदन के प्रतिष्ठित सेंट जॉर्ज अस्पताल से प्रशिक्षित हृदय रोग विशेषज्ञ बताया था। उन्होंने अपनी पहचान को विश्वसनीय बनाने के लिए बालों को ब्लीच किया और फर्जी प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए। प्राथमिक जांच में उनकी एमबीबीएस डिग्री एक महिला के नाम पर पाई गई, जिससे उनकी चिकित्सा योग्यता पर सवाल उठे हैं।
उच्च वेतन और सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग
मिशन अस्पताल में नरेंद्र यादव को आठ लाख रुपये मासिक वेतन पर नियुक्त किया गया था। अस्पताल आयुष्मान भारत योजना से जुड़ा हुआ था और सरकारी धन प्राप्त कर रहा था, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य संसाधनों के संभावित दुरुपयोग की चिंताएं बढ़ गई हैं।
आयुष्मान भारत योजना का दुरुपयोग
नरेंद्र यादव पर आरोप है कि उन्होंने आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के तहत फर्जी दावे प्रस्तुत कर सरकारी धन का अनुचित लाभ उठाया। यह योजना गरीब परिवारों को स्वास्थ्य बीमा प्रदान करने के लिए सरकार द्वारा चलाई जाती है, जिसमें प्रत्येक परिवार को प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का स्वास्थ्य कवर मिलता है। हाल ही में, इस योजना के तहत 3.56 लाख फर्जी दावों को खारिज किया गया, जिनकी कुल राशि ₹643 करोड़ थी, और 1,114 अस्पतालों को सूची से हटाया गया है।
पुलिस कार्रवाई और आगे की जांच
दमोह के पुलिस अधीक्षक श्रुत कीर्ति सोमवंशी ने बताया कि आरोपी के खिलाफ जालसाजी और धोखाधड़ी के आरोपों में प्राथमिकी दर्ज की गई है। गिरफ्तारी के बाद उसे अदालत में पेश किया जाएगा और उससे पूछताछ की जाएगी। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी इस मामले की जांच शुरू कर दी है, विशेष रूप से सरकारी स्वास्थ्य योजना के तहत हुई इन सर्जरी के मद्देनजर।
पूर्व में भी विवादास्पद गतिविधियां
यह भी सामने आया है कि 2006 में छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ला की एक निजी अस्पताल में सर्जरी के दौरान मृत्यु हुई थी, जिसमें नरेंद्र यादव का नाम जुड़ा हुआ है। इस घटना ने चिकित्सा क्षेत्र में प्रमाणपत्रों की सत्यता और नियुक्तियों की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
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