एर्नाकुलम जिले के मुनंबम और चेराई गांवों के लोगों का आरोप है कि वक्फ बोर्ड उनकी संपत्ति पर जबरन मालिकाना हक जताने की कोशिश कर रहा है, जबकि उनके पास वैध दस्तावेज और टैक्स रसीदें मौजूद हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें वर्षों से इस लड़ाई में न्याय नहीं मिला, और अब वक्फ संशोधन विधेयक उनके लिए उम्मीद की किरण बनकर आया है।
संसद से वक्फ संशोधन विधेयक पारित होने के कुछ ही घंटों बाद, केरल के मुनंबम गांव में राजनीतिक हवा बदलती दिखी। लगभग 50 स्थानीय लोगों ने शुक्रवार को भाजपा की सदस्यता ग्रहण की, वह भी उस गांव में, जहां वक्फ बोर्ड की कार्रवाई के खिलाफ लोग 174 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
वक्फ बोर्ड की मनमानी से नाराज ग्रामीण BJP के साथ
एर्नाकुलम जिले के मुनंबम और चेराई गांवों के लोगों का आरोप है कि वक्फ बोर्ड उनकी संपत्ति पर जबरन मालिकाना हक जताने की कोशिश कर रहा है, जबकि उनके पास वैध दस्तावेज और टैक्स रसीदें मौजूद हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें वर्षों से इस लड़ाई में न्याय नहीं मिला, और अब वक्फ संशोधन विधेयक उनके लिए उम्मीद की किरण बनकर आया है।
BJP नेताओं ने जताया साथ, मोदी से मुलाकात की इच्छा जताई
भाजपा के केरल अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने शुक्रवार को मुनंबम पहुंचकर भूख हड़ताल पर बैठे लोगों से मुलाकात की और उन्हें समर्थन का भरोसा दिलाया। इसी दौरान गांव के 50 लोगों ने भाजपा की सदस्यता ली। ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की इच्छा जताई, जिसके जवाब में चंद्रशेखर ने कहा कि वह पीएमओ से संपर्क कर बैठक की व्यवस्था कराने की कोशिश करेंगे।
संसद में चुप रहे गांधी भाई-बहन पर मंत्री सुरेश गोपी का तंज
केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने वक्फ संशोधन विधेयक को मुनंबम के लोगों के लिए फायदेमंद बताया। उन्होंने विपक्ष पर जनता को धर्म के नाम पर बांटने का आरोप लगाते हुए राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पर सवाल उठाया कि "अगर वे वाकई अल्पसंख्यकों के हितैषी हैं, तो उन्होंने संसद में इस मुद्दे पर चुप्पी क्यों साधी?"
वक्फ घोटाले का खुलासा करने वाले अनवर को धमकियां
इसी बीच, कर्नाटक अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष अनवर मणिपड्डी, जिन्होंने वक्फ संपत्ति घोटाले का पर्दाफाश किया था, ने दावा किया है कि उन्हें विदेश से जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। अनवर ने मंगलुरु पुलिस आयुक्त को शिकायत देकर सुरक्षा की मांग की है। यह घटनाक्रम बताता है कि वक्फ संपत्ति विवाद अब केवल कानूनी या धार्मिक मसला नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है, जिसका असर केरल से लेकर दिल्ली तक दिखाई दे रहा है।
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