क्या देश से भागे आर्थिक भगोड़ों की होगी वापसी?

Vishal Singh | विविधा | 110

पीएम मोदी ने कहा था की "देश का लूटा है तो, लौटाना पड़ेगा"। इस क्रम में मेहुल चौकसी की गिरफ्तारी के साथ फिर चर्चा में आए वो नाम, जिन्होंने कानून को ठेंगा दिखाया, जिनमे नीरव मोदी, विजय माल्या, ललित मोदी, नितिन संदेसरा आदि शामिल है। 

एक वक्त था जब हीरे की चमक से देश-विदेश में नाम कमाने वाले गीतांजलि ज्वैलर्स के मालिक मेहुल चौकसी को आज लोग एक और पहचान से जानते हैं — भारत का आर्थिक भगोड़ा। हाल ही में बेल्जियम में उनकी गिरफ्तारी की खबर ने फिर से उस लिस्ट को चर्चा में ला दिया है, जिसमें कुछ ऐसे नाम शामिल हैं जो देश का पैसा लेकर भागे और अब अंतरराष्ट्रीय कानून के शिकंजे में हैं।

लेकिन यह सिर्फ एक चौकसी की कहानी नहीं है...
ये कहानी उस सिस्टम की भी है, जो सालों तक आंख मूंदे बैठा रहा। और उन ताकतवर लोगों की भी, जो कानून से बड़े बन बैठे। चौकसी की तरह कई और नाम हैं जिन्होंने अरबों रुपये लेकर बैंकों को चूना लगाया और विदेशों में आलीशान जिंदगी जी रहे हैं। अब उन सभी का उल्टा समय आ गया है। 

ये हैं वो 'सितारे', जो अब संदिग्ध बन चुके हैं:

विजय माल्या – कभी 'किंग ऑफ गुड टाइम्स' के नाम से मशहूर, अब लंदन की गलियों में भारत के प्रत्यर्पण का इंतजार कर रहे हैं। ₹9,000 करोड़ का बैंक लोन लेकर फरार हुए थे।

नीरव मोदी – पंजाब नेशनल बैंक घोटाले के आरोपी, जिनका नाम देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटालों में से एक से जुड़ा। लंदन में गिरफ्तार हैं, प्रत्यर्पण प्रक्रिया जारी है।

ललित मोदी – आईपीएल के जनक, जिन पर मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं। अब लंदन में बसे हुए हैं।

नितिन संदेसरा – स्टर्लिंग बायोटेक ग्रुप के मालिक, जिन पर बैंकों से ₹5,000 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप है। वह नाइजीरिया में छिपे हुए बताए जाते हैं।

और अब, मेहुल चौकसी – जिनका नाम 13,000 करोड़ रुपये के PNB घोटाले में शामिल है। पहले डोमिनिका, अब बेल्जियम — लेकिन इस बार उनके खिलाफ मामला ज्यादा मजबूत नजर आ रहा है।

चौकसी की गिरफ्तारी: क्या यह टर्निंग पॉइंट होगा?
चौकसी की गिरफ्तारी इस मायने में अहम है क्योंकि यह भारत की कानूनी कोशिशों की एक बड़ी सफलता मानी जा सकती है। भारत सरकार ने पिछले कुछ सालों में Fugitive Economic Offenders Act और Interpol रेड कॉर्नर नोटिस जैसे कई कदम उठाए हैं। लेकिन सवाल यह भी है — क्या यह काफी है? क्या यह देश छोड़कर भाग चुके अन्य भगोड़ों के लिए चेतावनी बनेगा? क्या अब कानून से भागना इतना आसान नहीं रहेगा?

जनता का सवाल: “इतना समय क्यों लगा?”
हर बार जब कोई ऐसा आरोपी पकड़ा जाता है, तो लोगों के मन में यही सवाल उठता है — आखिर इतना समय क्यों लगता है उन्हें वापस लाने में? क्या सिस्टम जान-बूझकर ढीला है या अंतरराष्ट्रीय कानून की सीमाएं हमें रोकती हैं? मेहुल चौकसी की गिरफ्तारी एक कदम जरूर है, लेकिन मंज़िल अभी दूर है। असली न्याय तभी होगा जब चौकसी जैसे आर्थिक अपराधी भारत लौटकर कोर्ट में जवाब दें और उन हजारों लोगों को जवाब दें, जिनकी गाढ़ी कमाई उनके लालच की भेंट चढ़ गई।