श्री हनुमान जी की आरती हिंदी में

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हनुमान जी की आरती क्यों की जाती है? 
1. भक्ति और श्रद्धा की अभिव्यक्ति:
हनुमान जी की आरती उनके चरणों में श्रद्धा अर्पित करने का प्रतीक है। यह एक भावनात्मक व आध्यात्मिक समर्पण है।

2. संकटों से रक्षा:
हनुमान जी को संकटमोचक कहा जाता है। आरती करने से नकारात्मक ऊर्जा, भय, और बाधाएं दूर होती हैं।

3. आत्मबल और साहस की प्राप्ति:
आरती से मानसिक शांति, साहस और आत्मबल बढ़ता है। हनुमान जी बल, बुद्धि और भक्ति के प्रतीक हैं।

4. पूजा का समापन:
आरती पूजा-पाठ का अंतिम चरण होती है, जिसमें दीप-प्रकाश द्वारा भगवान की स्तुति की जाती है।

5. विशेष अवसरों पर विशेष फल:

  • मंगलवार व शनिवार को आरती करने से शनि दोष, ग्रह बाधा, व अज्ञात भय दूर होते हैं।
  • हनुमान जयंती पर आरती करने से दीर्घायु और इच्छित फल की प्राप्ति मानी जाती है।
  • अखंड रामायण के पाठ के दौरान यह आरती हनुमान जी के अमूल्य योगदान की स्मृति स्वरूप गाई जाती है।


श्री हनुमान जी की आरती (पारंपरिक) 

आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

जाके बल से गिरिवर काँपे।
रोग-दोष जाके निकट न झाँके॥

अंजनि-पुत्र महा बलदायी।
संतन के प्रभु सदा सहाई॥

दे बीरा रघुनाथ पठाए।
लंका जारि सिया सुधि लाए॥

लंका सो कोट समुद्र-सी खाई।
जात पवनसुत बार न लाई॥

लंका जारि असुर संहारे।
सियारामजी के काज संवारे॥

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।
आनि संजीवन प्राण उबारे॥

पैठि पताल तोरि जम-कारे।
अहिरावण की भुजा उखारे॥

बाएं भुजा असुर दल मारे।
दाहिने भुजा संतजन तारे॥

सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे।
जय जय जय हनुमान उचारे॥

कंचन थार कपूर लौ छाई।
आरती करत अंजना माई॥

जो हनुमानजी की आरती गावे।
बसि बैकुण्ठ परमपद पावे॥

विशेष अवसरों पर क्यों गाई जाती है यह आरती?
यह आरती हनुमान जी की वीरता, भक्ति, और रक्षक रूप की स्तुति करती है। यह विशेष रूप से इन अवसरों पर गाई जाती है:

  • मंगलवार / शनिवार व्रत के समापन पर |
  • श्री हनुमान जन्मोत्सव पर |
  • बूढ़े मंगलवार में पूजन के अंत में |
  • अखंड रामायण पाठ के समापन पर |