खाटू श्याम जी आरती हिंदी में

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खाटू श्याम जी को कलियुग के भगवान कहा जाता है। यह आरती श्रद्धा, विश्वास और समर्पण की प्रतीक है। 

खाटू श्याम जी की आरती कब की जाती है ?

  • रोज सुबह और शाम मंदिरों या घरों में की जाती है।
  • एकादशी, फाल्गुन मेले (विशेष रूप से खाटू श्याम जी का प्रसिद्ध मेला), और गुरुवार को विशेष भीड़ होती है।
  • विशेष संकट के समय या मन्नत पूर्ण होने पर भी आरती का आयोजन होता है।

कैसे की जाती है आरती?

  • श्याम बाबा की प्रतिमा या फोटो के समक्ष दीपक जलाएं।
  • फूल, चंदन, धूप-दीप से पूजन करें।
  • आरती की थाली में कपूर या घी का दीपक रखकर घुमाएं।
  • आरती करते समय भक्तजन शंख, घंटी और भजन के साथ जयकारे लगाते हैं।

कहां की जाती है आरती?

  • खाटू (राजस्थान) स्थित प्रसिद्ध श्याम मंदिर में आरती अत्यंत भव्य रूप में होती है।
  • भारत भर के श्याम मंदिरों, जैसे दिल्ली, कोलकाता, मथुरा, इंदौर आदि में रोज होती है।
  • भक्त अपने घरों में भी श्रद्धा से आरती करते हैं।

खाटू श्याम जी की आरती क्यों की जाती है?
खाटू श्याम जी को कलियुग के भगवान कहा जाता है। यह आरती श्रद्धा, विश्वास और समर्पण की प्रतीक है। 
आरती करने से: भक्तों के दुख, दरिद्रता और रोग मिटते हैं। मन को शांति और आत्मिक बल प्राप्त होता है। श्याम बाबा का कृपा-पात्र बनने का सौभाग्य मिलता है।

खाटू श्याम जी की आरती :-

ॐ जय श्री श्याम हरे,
बाबा जय श्री श्याम हरे ।
खाटू धाम विराजत,
अनुपम रूप धरे॥
ॐ जय श्री श्याम हरे,
बाबा जय श्री श्याम हरे ।

रतन जड़ित सिंहासन,
सिर पर चंवर ढुरे ।
तन केसरिया बागो,
कुण्डल श्रवण पड़े ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे,
बाबा जय श्री श्याम हरे ।

गल पुष्पों की माला,
सिर पार मुकुट धरे ।
खेवत धूप अग्नि पर,
दीपक ज्योति जले ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे,
बाबा जय श्री श्याम हरे ।

मोदक खीर चूरमा,
सुवरण थाल भरे ।
सेवक भोग लगावत,
सेवा नित्य करे ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे,
बाबा जय श्री श्याम हरे ।

झांझ कटोरा और घडियावल,
शंख मृदंग घुरे ।
भक्त आरती गावे,
जय-जयकार करे ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे,
बाबा जय श्री श्याम हरे ।

जो ध्यावे फल पावे,
सब दुःख से उबरे ।
सेवक जन निज मुख से,
श्री श्याम-श्याम उचरे ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे,
बाबा जय श्री श्याम हरे ।

श्री श्याम बिहारी जी की आरती,
जो कोई नर गावे ।
कहत भक्त-जन,
मनवांछित फल पावे ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे,
बाबा जय श्री श्याम हरे ।

जय श्री श्याम हरे,
बाबा जी श्री श्याम हरे ।
निज भक्तों के तुमने,
पूरण काज करे ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे,
बाबा जय श्री श्याम हरे ।

ॐ जय श्री श्याम हरे,
बाबा जय श्री श्याम हरे।
खाटू धाम विराजत,
अनुपम रूप धरे॥
ॐ जय श्री श्याम हरे,
बाबा जय श्री श्याम हरे ।