सरस्वती माता की आरती हिंदी में

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वसंत पंचमी (माघ शुक्ल पंचमी) को सरस्वती पूजा का विशेष महत्व होता है। अन्य अवसरों पर जैसे नवरात्रि के दिनों में भी देवी सरस्वती की पूजा की जाती है, खासकर दक्षिण भारत में।

सरस्वती माता को ज्ञान, संगीत, कला, विद्या, और बुद्धि की देवी माना जाता है। इनकी पूजा विशेष रूप से छात्रों, कलाकारों, लेखकों और शिक्षकों द्वारा की जाती है ताकि उन्हें बुद्धि, वाणी और विद्या में सफलता मिले। यह पूजा आत्मिक शुद्धि और मानसिक जागरण के लिए भी की जाती है।

सरस्वती पूजा कब होती है?

  • मुख्य पर्व: वसंत पंचमी (माघ शुक्ल पंचमी) को सरस्वती पूजा का विशेष महत्व होता है।
  • अन्य अवसरों पर जैसे नवरात्रि के दिनों में भी देवी सरस्वती की पूजा की जाती है, खासकर दक्षिण भारत में।

सरस्वती पूजा कहाँ होती है?

  • विद्यालयों, कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों में विशेष रूप से।
  • घरों, मंदिरों और पंडालों में भी पूजा का आयोजन होता है।
  • बिहार, बंगाल, ओडिशा, असम, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक में विशेष उत्सव के रूप में मनाई जाती है।

सरस्वती पूजा कैसे की जाती है?

  • प्रातःकाल स्नान कर साफ-सुथरे वस्त्र पहनें।
  • पूजा स्थल पर देवी सरस्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • पीले वस्त्र, फूल, चावल, किताबें, कलम और वाद्ययंत्र आदि चढ़ाएं।
  • सरस्वती मंत्र या अष्टक का जाप करें।
  • आरती करें और प्रसाद वितरण करें।
  • विद्या आरंभ करने वाले बच्चों का ‘हाथ पकड़ कर लेखन संस्कार’ भी किया जाता है।

सरस्वती माता की आरती हिंदी में

जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता।
सदगुण, वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥ जय...

चंद्रवदनी पद्मासिनी, द्युति मंगलकारी।
सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥ जय...

बीन, पुस्तक, वरमुद्रा, पहनें मेखला माला।
शुभ्र वस्त्र, शुचि शीतल, मन मोहक लाला॥ जय...

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्री रघुवर मन भावत, रत्न चतुर्दशी राती॥ जय...

आरती माता स्वीकारो, ज्ञान विवेक बढ़ाओ।
भक्तों के कष्ट निवारो, सुख-सम्पत्ति लाओ॥ जय...

जो जन नित गावे, भाव से गुण गाता।
कहत शुभानंद स्वामी, सुख-सम्पत्ति पाता॥ जय...