यह मामला जितना फिल्मी दिखता है, उतना ही सामाजिक रूप से गंभीर है। सवाल यह भी है कि जब एक महिला अपनी ही बेटी के मंगेतर को ‘रक्षा कवच’ समझने लगे, तो दोष किसका है? रिश्तों का? हालातों का? या समाज के बनाए नियमों का?
इस एक कॉल ने न सिर्फ दो ज़िंदगियों की दिशा बदल दी, बल्कि पूरे समाज को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। अलीगढ़ से सामने आया यह मामला अब महज़ ‘सास-दामाद का फरार कांड’ नहीं रहा — यह एक महिला की पीड़ा, रिश्तों की उलझन और सामाजिक असंवेदनशीलता का प्रतीक बन गया है।
शादी के दिन अलीगढ़ लौटे फरार प्रेमी जोड़े
16 अप्रैल को, जिस दिन अलीगढ़ की शिवानी की शादी होनी थी, उसी दिन उसकी मां सपना और होने वाला पति राहुल थाने में सरेंडर करने पहुंच गए। दस दिन पहले दोनों अचानक लापता हो गए थे। अब मडराक थाने में बैठकर, दोनों ने भागने की जो कहानी सुनाई, वह चौंकाने वाली थी।
मैं नहीं भागा, मैं बचा रहा था :राहुल
दामाद राहुल का कहना है कि उसका सपना के साथ पहले से कोई प्लान नहीं था। "मैं तो उस दिन शेरवानी लेने जा रहा था… तभी सपना आंटी का फोन आया। वो डरी हुई थी, रो रही थी। उसने कहा कि अगर मैं नहीं आया, तो वो जान दे देगी। मैं घबरा गया और स्टेशन पहुंचा… फिर हम लखनऊ और वहां से बिहार मुजफ्फरपुर चले गए।" राहुल का दावा है कि वह सास की हालत देखकर बेचैन हो गया था। "उसे घरवाले टॉर्चर करते थे। पति शराब पीकर मारता था। उसने मुझसे कहा कि अब और नहीं सह सकती।"
पति पर गंभीर आरोप, सोशल मीडिया बना दबाव
महिला ने अपने पति पर घरेलू हिंसा और प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। वहीं राहुल ने भी ससुर जितेंद्र पर दोष मढ़ते हुए कहा कि उन्हें हमारा बात करना पसंद नहीं था। इस पूरे मामले के सोशल मीडिया पर वायरल हो जाने के बाद पुलिस एक्टिव हुई और लोकेशन ट्रेस कर ली गई। तब जाकर दोनों ने खुद थाने पहुंचकर सरेंडर करने का फैसला लिया।
"शादी नहीं हुई, लेकिन अगर वो चाहेंगी, तो कर लूंगा"
राहुल ने यह भी कबूल किया कि पहले उसका एक अफेयर हरदोई की महिला से था, लेकिन पंचायत में फैसला हो चुका है और अब वह अलग हो चुके हैं। सास के साथ शादी की संभावना पर राहुल का जवाब था, "अगर वो चाहेंगी, तो कर लूंगा।" हालांकि अभी तक महिला ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
सवाल बाकी हैं, क्या सिर्फ प्यार था या पीड़ा से उपजा पलायन?
यह मामला जितना फिल्मी दिखता है, उतना ही सामाजिक रूप से गंभीर है। सवाल यह भी है कि जब एक महिला अपनी ही बेटी के मंगेतर को ‘रक्षा कवच’ समझने लगे, तो दोष किसका है? रिश्तों का? हालातों का? या समाज के बनाए नियमों का? पुलिस अब दोनों से पूछताछ कर रही है और मामला तफ्तीश में है। लेकिन यह कहानी बताती है कि कभी-कभी भागना, किसी के लिए मोहब्बत नहीं… ज़िंदा रहने की आखिरी उम्मीद होती है।
Related Items
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी: प्रो. आदम मलिक खान इस्लामिक स्टडीज विभाग के अध्यक्ष नियुक्त
अलीगढ़ में सपा सांसद रामजीलाल सुमन के काफिले पर हंगामा, काली स्याही और टायर फेंके
सास-दामाद के बाद, समधन-समधी ने तोड़ी सामाजिक मर्यादाओं की दीवार, घर से भागे