सास-दामाद के बाद, समधन-समधी ने तोड़ी सामाजिक मर्यादाओं की दीवार, घर से भागे

Vishal Singh | उत्तर प्रदेश | 236

रिश्तों की दीवारें दरकती जा रहीं हैं, अलीगढ़ की घटना, जहां सास अपने दामाद के साथ चली गई थी। वही, बदायूं का यह ताज़ा मामला, जिसमे एक महिला अपने समधी यानी अपनी बेटी के ससुर के साथ प्रेम संबंध में लिप्त होकर घर छोड़ भाग गई। इसमें दो परिवारों का ताना-बाना पूरी तरह टूट गया।

उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले से आई एक खबर ने एक बार फिर रिश्तों की पवित्रता और सामाजिक मर्यादाओं पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक महिला अपने समधी यानी अपनी बेटी के ससुर के साथ प्रेम संबंध में लिप्त होकर घर छोड़ भाग गई। इस घटना ने सिर्फ एक परिवार को नहीं तोड़ा, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी झकझोर दिया है। यह कहानी केवल ‘प्रेम में अंधे होकर भाग जाने’ की नहीं है, बल्कि उन रिश्तों की है, जिनकी सीमाएं समाज ने वर्षों से तय की थीं। अब जब वे सीमाएं टूटती दिख रही हैं, तो सवाल यह है कि हम किस दिशा में बढ़ रहे हैं?

तीन साल पहले बनी बेटी की शादी, उसी के ससुर से पनपा रिश्ता
महिला की बेटी की शादी 2022 में हुई थी। विवाह के बाद से ही महिला का अपने समधी से मेलजोल बढ़ता गया और यह रिश्ता धीरे-धीरे अवैध प्रेम में बदल गया। पति अक्सर ट्रक ड्राइवर के रूप में बाहर रहता था, और उसी दौरान समधी का आना-जाना बढ़ता गया। अब जब दोनों फरार हो गए हैं, तो पीछे चार बच्चों और एक बिखरा हुआ परिवार छूट गया है।

बच्चों ने खोला राज, समाज हुआ स्तब्ध
महिला के बेटे ने खुद स्वीकार किया कि उसकी मां अक्सर उसकी बहन के ससुर को घर बुलाती थी। यह सिलसिला इस हद तक बढ़ गया कि बच्चों को दूसरे कमरे में भेज दिया जाता था। पड़ोसियों ने भी बताया कि रिश्तेदार होने के नाते किसी ने संदेह नहीं किया, लेकिन देर रात आने-जाने पर लोगों ने जरूर कानाफूसी शुरू कर दी थी।

यह सिर्फ प्रेम नहीं, पारिवारिक व्यवस्था पर हमला है
ऐसे मामले अब बार-बार सामने आ रहे हैं — अलीगढ़ की घटना भी इसी कड़ी का उदाहरण थी, जहां सास अपने दामाद के साथ चली गई थी। बदायूं का यह ताज़ा मामला अब और भी भयावह है क्योंकि इसमें दो परिवारों का ताना-बाना पूरी तरह टूट गया।  एक मां अपनी बेटी के ससुर से रिश्ते बनाती है, ये सिर्फ रिश्तों की मर्यादा का पतन नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए एक मनोवैज्ञानिक संकट भी है। इस स्थिति में न केवल पति और बच्चे मानसिक आघात झेलते हैं, बल्कि बेटी के वैवाहिक जीवन पर भी स्थायी असर पड़ता है।

समाज को आत्मचिंतन की ज़रूरत
आज जब डिजिटल माध्यमों से संबंधों का स्वरूप तेज़ी से बदल रहा है, तब ऐसे घटनाक्रम यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि क्या आधुनिकता के नाम पर हम रिश्तों की बुनियादी समझ ही खोते जा रहे हैं? क्या हमारे समाज में संवाद की कमी और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की अराजक व्याख्या पारिवारिक संतुलन को तोड़ रही है?

पुलिस कर रही जांच, लेकिन जवाब समाज को देना होगा
पति की शिकायत पर पुलिस ने महिला द्वारा घर से जेवर और नकदी ले जाने की जांच शुरू कर दी है। लेकिन इस पूरी घटना का सबसे बड़ा पहलू यह है कि अब हमें केवल कानून की नहीं, समाज की जवाबदेही की भी ज़रूरत है।