अमित शाह ने टीएमसी सरकार पर आरोप लगाया कि बांग्लादेशी घुसपैठियों को आधार कार्ड देने का काम बंगाल सरकार कर रही है। उन्होंने कहा, "जब कांग्रेस की सरकार थी, तब ये घुसपैठिए असम के रास्ते भारत में घुसते थे, लेकिन अब ये पश्चिम बंगाल के रास्ते घुसते हैं, जहां टीएमसी सत्ता में है।"
लोकसभा में 'अप्रवासन और विदेशी विधेयक, 2025' पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सख्त लहजे में कहा कि "भारत कोई धर्मशाला नहीं है" और मोदी सरकार सिर्फ उन्हीं लोगों को देश में प्रवेश करने से रोकेगी, जिनके इरादे दुर्भावनापूर्ण हैं। उन्होंने साफ कहा कि जो लोग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं, उन्हें भारत में घुसने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
बांग्लादेशी घुसपैठ पर टीएमसी को घेरा
अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि बांग्लादेशी घुसपैठियों को आधार कार्ड देने का काम बंगाल सरकार कर रही है। उन्होंने कहा, "जब कांग्रेस की सरकार थी, तब ये घुसपैठिए असम के रास्ते भारत में घुसते थे, लेकिन अब ये पश्चिम बंगाल के रास्ते घुसते हैं, जहां टीएमसी सत्ता में है।"
"बांग्लादेशी घुसपैठियों को आधार कार्ड कौन देता है?"
गृह मंत्री ने दावा किया कि जो भी बांग्लादेशी घुसपैठिए पकड़े गए हैं, उनके पास पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले का आधार कार्ड मिला है। शाह ने कहा, "टीएमसी सरकार इन घुसपैठियों को आधार कार्ड और वोटर कार्ड जारी कर रही है, जिससे वे दिल्ली तक पहुंच रहे हैं। अगर आप (टीएमसी) उन्हें आधार कार्ड देना बंद कर दें, तो कोई परिंदा भी पर नहीं मार पाएगा।"
सुरक्षा पर मोदी सरकार का कड़ा रुख
अमित शाह ने साफ किया कि मोदी सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी। सरकार का मकसद सिर्फ अवैध घुसपैठियों को रोकना और देश की सीमाओं को सुरक्षित बनाना है।
सियासी तकरार तेज
अमित शाह के इस बयान के बाद विपक्ष, खासकर टीएमसी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। टीएमसी का कहना है कि भाजपा इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रही है। वहीं, भाजपा का कहना है कि देश की सुरक्षा के लिए घुसपैठियों को रोकना जरूरी है। अब देखना होगा कि इस बयानबाजी के बाद राजनीति किस करवट बैठती है।
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