इस वर्ष चैत्र पूर्णिमा की तिथि 12 अप्रैल को पड़ रही है और इसी दिन हनुमान जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, भगवान हनुमान का जन्म त्रेतायुग के अंतिम चरण में हुआ था, जब मंगलवार, चित्रा नक्षत्र, मेष लग्न, और चैत्र पूर्णिमा का दुर्लभ योग बना था। यह समय था सुबह 6:03 बजे, और स्थान था वर्तमान हरियाणा राज्य का कैथल जिला, जिसे उस समय कपिस्थल कहा जाता था।
हनुमान जयंती, भगवान हनुमान के जन्म के उपलक्ष्य में मनाया जाने वाला एक प्रमुख हिंदू त्योहार है। साल 2025 में यह 12 अप्रैल को उदया तिथि के अनुसार बड़े धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। यह दिन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि साहस, शक्ति, भक्ति और सेवा जैसे गुणों को अपनाने का एक अवसर भी होता है।
क्यों मनाई जाती है हनुमान जयंती?
हनुमान जयंती हर साल दो बार मनाई जाती है:
इस वर्ष चैत्र पूर्णिमा की तिथि 12 अप्रैल को पड़ रही है और इसी दिन हनुमान जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, भगवान हनुमान का जन्म त्रेतायुग के अंतिम चरण में हुआ था, जब मंगलवार, चित्रा नक्षत्र, मेष लग्न, और चैत्र पूर्णिमा का दुर्लभ योग बना था। यह समय था सुबह 6:03 बजे, और स्थान था वर्तमान हरियाणा राज्य का कैथल जिला, जिसे उस समय कपिस्थल कहा जाता था।
हनुमान जी की शिक्षाएं और ज्योतिषीय महत्व
भगवान हनुमान को चिरंजीवी यानी अमर माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम ने उन्हें कलियुग के अंत तक पृथ्वी पर रहने का वरदान दिया था। हनुमान जी के गुरु सूर्यदेव थे, जिन्होंने उन्हें वेदों का गूढ़ ज्ञान प्रदान किया। हनुमान जी की विद्वता, विनम्रता और बल के कारण उन्हें "ज्ञानियों में अग्रगण्य" माना गया है।
ज्योतिष शास्त्र में मंगलवार को हनुमान जी की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है, क्योंकि यह दिन मंगल ग्रह से संबंधित होता है, जो शक्ति, पराक्रम और रक्षा का प्रतीक है। इस दिन व्रत रखने और हनुमान चालीसा, सुंदरकांड, रामचरितमानस का पाठ करने से सभी तरह के भय, संकट और मानसिक अस्थिरता से मुक्ति मिलती है।
हनुमान जयंती पर क्या करें?
प्रातः काल स्नान के बाद हनुमान जी की मूर्ति या चित्र पर सिंदूर, चमेली का तेल, फूल और लड्डू अर्पित करें।
एक ऐतिहासिक रोचक तथ्य: हनुमान जी और मतंग जनजाति से मिलन
धार्मिक कथाओं में उल्लेख है कि हनुमान जी 41 वर्षों के बाद एक बार फिर श्रीलंका की मतंग जनजाति से मिले थे। यह कथा इस ओर इशारा करती है कि हनुमान जी का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं था, बल्कि उनका प्रभाव समस्त भारतीय उपमहाद्वीप में फैला हुआ था।
हनुमान जयंती केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मबल, साहस और भक्ति की प्रेरणा है। भगवान हनुमान की उपासना करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में दृढ़ता, निष्ठा और विश्वास का संचार होता है। 12 अप्रैल 2025 को जब भक्तगण मिलकर ‘जय बजरंगबली’ का उद्घोष करेंगे, तो आस्था और भक्ति की शक्ति एक बार फिर दिखेगी।
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