Vaishakh Purnima 2025 Kab Hai: 11 या 12 मई कब है वैशाख पूर्णिमा? जानें तारीख और शुभ मुहूर्त

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2025 में लोग इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि वैशाख पूर्णिमा 11 मई को है या 12 मई को। आइए जानते हैं इस खास दिन की सटीक तिथि, शुभ मुहूर्त और इसका धार्मिक महत्व।

Vaishakh Purnima 2025 Kab Hai: वैशाख पूर्णिमा  हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख मास की अंतिम तिथि होती है। यह दिन सिर्फ एक पूर्णिमा तिथि नहीं, बल्कि भगवान बुद्ध की जयंती यानी बुद्ध पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है। 2025 में लोग इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि वैशाख पूर्णिमा 11 मई को है या 12 मई को। आइए जानते हैं इस खास दिन की सटीक तिथि, शुभ मुहूर्त और इसका धार्मिक महत्व।

वैशाख पूर्णिमा 2025 की तारीख और तिथि

  • पूर्णिमा तिथि आरंभ: 11 मई 2025, शनिवार को शाम 06 बजकर 55 मिनट
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त: 12 मई 2025, रविवार को शाम 05 बजकर 59 मिनट

इस आधार पर, वैशाख पूर्णिमा व्रत और पूजन का मुख्य दिन 12 मई 2025 (रविवार) को मनाया जाएगा क्योंकि पूर्णिमा तिथि उस दिन सूर्योदय काल में रहेगी।

वैशाख पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त (Purnima Puja Muhurat)
पूनम का व्रत और पूजन मुहूर्त
 12 मई 2025 को प्रातः 05:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक
 (स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में अंतर हो सकता है)

वैशाख पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
1.बुद्ध पूर्णिमा: इसी दिन भगवान गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था। इसलिए यह दिन बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए सबसे बड़ा पर्व है।
2. स्नान और दान का महत्व: इस दिन गंगा या पवित्र नदियों में स्नान करके दान-पुण्य करने से पापों का नाश और पुण्य की प्राप्ति होती है।
3. सत्यनारायण व्रत कथा: कई घरों में इस दिन श्री विष्णु भगवान की सत्यनारायण कथा का आयोजन भी होता है।
4. ध्यान और साधना: यह दिन मानसिक शांति और ध्यान के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।

क्या करें वैशाख पूर्णिमा के दिन?

  • प्रातः स्नान कर सूर्य को अर्घ्य दें
  • तुलसी, भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की पूजा करें
  • सत्यनारायण व्रत कथा का आयोजन करें
  • गाय, ब्राह्मण और जरूरतमंदों को भोजन और वस्त्र दान करें
  • बौद्ध मठों में दीपदान और बुद्ध वंदना करें

विशेष मान्यता
हिंदू मान्यता के अनुसार, वैशाख पूर्णिमा का दिन मोक्ष प्राप्ति और संतान सुख के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है। वहीं बौद्ध धर्म के अनुसार, यह दिन त्रिविध चमत्कारों से जुड़ा है—भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण—तीनों घटनाएं इसी दिन हुई थीं।