अक्षय तृतीया केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की उस आस्था की अभिव्यक्ति है जिसमें शुभ कर्म, सेवा और समर्पण से जीवन को समृद्ध बनाया जा सकता है। इस दिन किया गया दान, पूजा और खरीददारी अक्षय पुण्य प्रदान करती है, यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।
अक्षय तृतीया एक अत्यंत पावन और शुभ तिथि मानी जाती है, जिसे 'अखा तीज' भी कहा जाता है। 'अक्षय' का अर्थ होता है, जिसका कभी क्षय न हो यानी जो कभी न समाप्त हो। इस दिन किए गए शुभ कार्यों का फल अनंतकाल तक अक्षय रहता है। यह तिथि वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को आती है, और इसे जैन और हिन्दू धर्म में विशेष स्थान प्राप्त है।
क्यों मनाई जाती है अक्षय तृतीया?
इस दिन अनेक पौराणिक घटनाएं घटी थीं, जिनमें मुख्य हैं:
कैसे मनाई जाती है अक्षय तृतीया?
कब और कहां मनाई जाती है?
यह पर्व हर वर्ष अप्रैल-मई के बीच आता है और भारत के सभी हिस्सों में, विशेषकर उत्तर भारत, पश्चिम भारत (राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र), दक्षिण भारत और नेपाल में बड़े उत्साह से मनाया जाता है।
इस दिन क्या खरीदना चाहिए और क्यों?
अक्षय तृतीया केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की उस आस्था की अभिव्यक्ति है जिसमें शुभ कर्म, सेवा और समर्पण से जीवन को समृद्ध बनाया जा सकता है। इस दिन किया गया दान, पूजा और खरीददारी अक्षय पुण्य प्रदान करती है, यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।
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