भारतीय राजनीति में 'नई सेक्युलर' पार्टियों का उदय

Vishal Singh | राजनीति | 85

मुस्लिम वोट बैंक पर निर्भर रहने वाली इन पार्टियों ने वक्फ बिल पर भाजपा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर समर्थन दिया और साथ ही सेक्युलरिज्म की नई परिभाषा गढ़ी। अब इन नव-धर्मनिरपेक्ष दलों के लिए भाजपा सांप्रदायिक दल नहीं रही। इस बदलाव का भारतीय राजनीति पर आने वाले दशकों तक प्रभाव रहेगा।

संसद में वक्फ संशोधन विधेयक पारित होते ही भारतीय राजनीति में एक नए ध्रुवीकरण की तस्वीर उभरकर सामने आई है। अब कुछ दल ऐसे भी हैं जो मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति से ऊपर उठकर भाजपा के एजेंडे के साथ खड़े हो गए हैं। जेडीयू, तेलगूदेशम, जेडीएस, एनसीपी, लोजपा (रामविलास), राष्ट्रीय लोकदल और असम गण परिषद जैसी पार्टियों ने इस विधेयक के समर्थन में मतदान किया।

बीजेपी के साथ खड़ी 'नई सेक्युलर' पार्टियां
इन दलों ने स्पष्ट कर दिया कि वे मानते हैं कि मोदी सरकार इस बिल के माध्यम से वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को बचाने का प्रयास कर रही है। इतना ही नहीं, एनडीए से बाहर रहने वाली बीजू जनता दल (बीजेडी) ने भी राज्यसभा में समर्थन देकर नए सेक्युलर दलों की इस नई धारा को और मजबूत कर दिया। मुस्लिम वोट बैंक पर निर्भर रहने वाली इन पार्टियों ने वक्फ बिल पर भाजपा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर समर्थन दिया और साथ ही सेक्युलरिज्म की नई परिभाषा गढ़ी। अब इन नव-धर्मनिरपेक्ष दलों के लिए भाजपा सांप्रदायिक दल नहीं रही। इस बदलाव का भारतीय राजनीति पर आने वाले दशकों तक प्रभाव रहेगा।

देवेगौड़ा की तारीफ और प्रफुल्ल पटेल के बयान के सियासी मायने
राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान जनता दल (सेक्युलर) के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा ने वक्फ संपत्तियों की रक्षा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ की। वहीं, एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने कांग्रेस को चुनौती दी और सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस, शिवसेना के साथ रहते हुए खुद को सेक्युलर कह सकती है? जेडीयू के नेता ललन सिंह ने भी भाजपा के मुस्लिम विरोधी होने के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष गलत नैरेटिव बना रहा है कि वक्फ संशोधन बिल मुसलमान विरोधी है। उनका बयान "अगर आपको मोदी का चेहरा पसंद नहीं है तो मत देखिए" सदन में चर्चा का विषय बन गया।

राजनीतिक ध्रुवीकरण का नया दौर
पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा और प्रफुल्ल पटेल जैसे दिग्गज नेता भारतीय राजनीति में सेक्युलर राजनीति के बड़े चेहरे माने जाते हैं। लेकिन इन नेताओं ने भाजपा की नीति का समर्थन करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि वक्फ संशोधन विधेयक को सांप्रदायिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। वक्फ संशोधन विधेयक पर हुए इस राजनीतिक ध्रुवीकरण ने यह साबित कर दिया है कि अब भारतीय राजनीति में सेक्युलरिज्म की नई परिभाषा गढ़ी जा रही है। इस नए राजनीतिक समीकरण का असर आगामी चुनावों और भविष्य की राजनीति पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।