दिल्ली नगर निगम के मेयर पद के लिए चुनाव 25 अप्रैल 2025 को होना है। आज यानी 20 अप्रैल को नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि थी। ऐसे में AAP के मैदान छोड़ने के बाद यह चुनाव अब केवल औपचारिकता भर रह गया है।
दिल्ली की राजनीति में एक बड़ा मोड़ सामने आया है। राजधानी में मुख्यमंत्री पद पर पहले से काबिज भारतीय जनता पार्टी (BJP) अब दिल्ली नगर निगम (MCD) के मेयर पद पर भी अपनी पकड़ मजबूत करने जा रही है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने मेयर पद के चुनाव से हटने का फैसला किया है, जिससे यह लगभग तय हो गया है कि दिल्ली को अब बीजेपी का मेयर मिलेगा।
25 अप्रैल को है मेयर पद का चुनाव, नामांकन का आज आखिरी दिन
दिल्ली नगर निगम के मेयर पद के लिए चुनाव 25 अप्रैल 2025 को होना है। आज यानी 20 अप्रैल को नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि थी। ऐसे में AAP के मैदान छोड़ने के बाद यह चुनाव अब केवल औपचारिकता भर रह गया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, AAP ने मौजूदा राजनीतिक हालात और दिल्ली सरकार के खिलाफ चल रही कार्रवाईयों को ध्यान में रखते हुए यह रणनीतिक निर्णय लिया है। इससे पहले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी और फिर पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों ने आम आदमी पार्टी को बैकफुट पर ला दिया है।
BJP का दावा – “जनता ने हमें चुना, अब हम करेंगे सेवा”
भाजपा नेताओं ने आम आदमी पार्टी के फैसले को “जनता की जीत” बताया है। दिल्ली बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा, "दिल्ली की जनता ने भ्रष्टाचार के खिलाफ वोट दिया है। पहले मुख्यमंत्री और अब मेयर – जनता ने तय कर लिया है कि उन्हें ईमानदार और जवाबदेह सरकार चाहिए।" पार्टी के अन्य नेताओं का मानना है कि MCD में बीजेपी की वापसी से सफाई, पार्किंग, सड़कों और सीवेज जैसी मूलभूत सुविधाओं में सुधार देखने को मिलेगा।
AAP की चुप्पी, विपक्ष में बढ़ती बेचैनी
AAP की ओर से अभी तक कोई औपचारिक प्रेस कांफ्रेंस नहीं हुई है, लेकिन पार्टी से जुड़े कुछ नेताओं ने मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में इस फैसले को "राजनीतिक दबाव" का परिणाम बताया है। उनका कहना है कि लगातार हो रही छापेमार कार्रवाई, ED और CBI की जांच और नेताओं की गिरफ्तारी के चलते पार्टी का ध्यान प्रशासनिक से ज़्यादा कानूनी लड़ाई में लगा है। पार्टी सूत्रों का यह भी कहना है कि "न्यायपालिका में विश्वास रखते हुए" वे फिलहाल संसाधनों और ध्यान को कोर्ट केसों पर केंद्रित करना चाहते हैं।
राजनीतिक विश्लेषण: दिल्ली में AAP की पकड़ कमजोर?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला आम आदमी पार्टी की राजनीतिक रणनीति में एक बदलाव की ओर इशारा करता है। जिस पार्टी ने दिल्ली में क्लीन पॉलिटिक्स और विकास के नाम पर भारी बहुमत पाया था, आज वो MCD जैसी महत्वपूर्ण संस्था के चुनाव से हट रही है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञ इसे AAP की "बैठकर ताकत इकट्ठा करने" की रणनीति मानते हैं। वहीं, भाजपा के लिए यह एक बड़ा मनोवैज्ञानिक लाभ है, जो 2025 के विधानसभा चुनावों के लिए माहौल बनाने में मदद कर सकता है।
दिल्ली की राजनीति ने एक और करवट ली है। मुख्यमंत्री के बाद अब मेयर पद पर भी भाजपा की जीत तय है। आम आदमी पार्टी के इस फैसले का भविष्य पर क्या असर होगा, यह तो समय ही बताएगा, लेकिन फिलहाल दिल्ली में भगवा रंग और भी गहरा होता दिख रहा है।
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