मैंगो मैन ऑफ इंडिया: हाजी कलीमुल्लाह खान की अनोखी आम की दुनिया

Vishal Singh | अलग हट के! | 161

इन्होंने एक ही आम के पेड़ पर 300 से ज़्यादा किस्मों के आम उगा दिए! और ये कोई कहानी नहीं, हकीकत है। इनके इस अनोखे काम का नाम "लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड्स"  में भी दर्ज है।

जब हम भारत में आम की बात करते हैं, तो सबसे पहले ज़ुबान पर आता है स्वाद, खुशबू और गर्मियों की यादें। लेकिन अगर आप उत्तर प्रदेश के मलिहाबाद चले जाएं, तो वहां आपको एक ऐसा इंसान मिलेगा, जिसने आम की पहचान ही बदल दी — वो हैं हाजी कलीमुल्लाह खान, जिन्हें देश-विदेश में लोग ‘मैंगो मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से जानते हैं।

लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड्स में दर्ज है, हाजी कलीमुल्लाह खान का कारनामा 
84 साल के हाजी साहब ने वो कर दिखाया है, जो अब तक सिर्फ किताबों में पढ़ा या फिल्मों में देखा जाता था। इन्होंने एक ही आम के पेड़ पर 300 से ज़्यादा किस्मों के आम उगा दिए! और ये कोई कहानी नहीं, हकीकत है। इनके इस अनोखे काम का नाम "लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड्स"  में भी दर्ज है।

ग्राफ्टिंग से कर दिखाया कमाल
हाजी कलीमुल्लाह खान ने बागवानी की वो तकनीक अपनाई, जिसे ग्राफ्टिंग कहते हैं। इसमें एक ही पेड़ में अलग-अलग आम की किस्मों की टहनियां जोड़ दी जाती हैं। फिर वो टहनियां अपना फल देने लगती हैं। सालों की मेहनत और अनुभव ने इस काम को मुमकिन बनाया। हाजी साहब खुद कहते हैं, "पेड़ को बच्चे की तरह पालना पड़ता है। प्यार, सब्र और समझदारी से काम लोगे, तो पेड़ भी कुछ अलग कर दिखाता है।"

आम और नाम दोनों बना दिए खास
कलीमुल्लाह खान ने ग्राफ्टिंग से विशेष तरह के आम की वैरायटी बनायीं और इनको नाम भी विशेष दिए, जैसे - सोनिया, मोदी, अमित शाह, सचिन, ऐश्वर्या, और अखिलेश जैसे कई राजनेताओं और सेलिब्रिटीज के नाम पर! बता दें की इन आमों का स्वाद, रंग, आकार – सब कुछ अलग है। कोई मीठा, कोई खुशबूदार, तो कोई बहुत भारी। कुछ आम तो 2 किलो तक के भी होते हैं।

सिर्फ भारत में नहीं, विदेशों में भी फैन फॉलोइंग
हाजी कलीमुल्लाह खान का नाम अब सिर्फ मलिहाबाद तक सीमित नहीं है। अमेरिका, इंग्लैंड, जापान जैसे देशों के वैज्ञानिक और रिसर्चर भी उनके बाग देखने आ चुके हैं। उनका पेड़ और बाग अब एक तरह से 'मैंगो म्यूज़ियम' बन चुका है।

मिल चुका है देश का सम्मान
उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 2008 में पद्मश्री से नवाज़ा। ये सम्मान उन लोगों को दिया जाता है, जिन्होंने अपने काम से देश का नाम रोशन किया हो – और हाजी साहब ने आम के ज़रिए ये बखूबी कर दिखाया।

आज की पीढ़ी के लिए मिसाल
जब आज के जमाने में लोग खेती को छोड़कर शहर की ओर भाग रहे हैं, तब हाजी कलीमुल्लाह खान जैसे लोग ये साबित करते हैं कि खेती में भी नाम, शोहरत और इज्जत सब कुछ है। वो आज भी युवाओं को आम की खेती के बारे में सिखाते हैं और प्रेरित करते हैं कि अपने पैरों पर खड़े हों – वो भी अपनी मिट्टी से जुड़कर।

जीवन एक मिसाल
हाजी कलीमुल्लाह खान का जीवन एक मिसाल है – कैसे प्यार, धैर्य और जुनून से कोई भी साधारण इंसान असाधारण बन सकता है। उनका एक पेड़ सिर्फ आम नहीं देता, बल्कि वो हमें सिखाता है कि “अगर दिल से चाहो और मेहनत करो, तो पेड़ भी जादू कर सकते हैं।”