कम पढ़े-लिखे अपराधियों का हाईटेक फ्रॉड: उबर को करोड़ों का नुकसान

Vishal Singh | अलग हट के! | 107

आरोपी फर्जी आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस बनाकर उबर कंपनी की फर्जी IDs तैयार करते थे और ट्रैक्सी बुकिंग के नाम पर रोजाना 40 से 50 हजार रुपये की ठगी करते थे। आरोपी फोटो एडिटिंग ऐप और गूगल लेंस की मदद से आधार व लाइसेंस में नाम, पता और फोटो बदलकर दस्तावेज तैयार करते थे। 

टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल अब सिर्फ तरक्की के लिए नहीं, बल्कि ठगी के लिए भी होने लगा है। इसका ताज़ा उदाहरण ग्रेटर नोएडा में सामने आया है, जहाँ 10वीं और 12वीं पास दो युवकों ने हाईटेक तरीकों से उबर जैसी अंतरराष्ट्रीय कैब कंपनी को लाखों का चूना लगा दिया।

एडीसीपी ग्रेटर नोएडा सुधीर कुमार के अनुसार, मंगलवार रात घरबरा अंडरपास के पास चेकिंग के दौरान एक कार सवार दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहम्मद उमेर (निवासी सुंदर नगरी, दिल्ली) और मुजफ्फर जमाल (निवासी भजनपुरा, दिल्ली) के रूप में हुई है।

पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी फर्जी आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस बनाकर उबर कंपनी की फर्जी IDs तैयार करते थे और ट्रैक्सी बुकिंग के नाम पर रोजाना 40 से 50 हजार रुपये की ठगी करते थे। आरोपी फोटो एडिटिंग ऐप और गूगल लेंस की मदद से आधार व लाइसेंस में नाम, पता और फोटो बदलकर दस्तावेज तैयार करते थे। एक फर्जी आधार कार्ड से वे 10 से अधिक IDs बना लेते थे।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 21 मोबाइल फोन, 500 फर्जी आधार कार्ड की फोटो कॉपी, एक प्रिंटर, एक पिट्ठू बैग, और एक कार समेत अन्य सामग्री बरामद की है। गिरोह में और भी लोग शामिल हैं, जिनकी तलाश जारी है।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी पिछले एक महीने से यह फर्जीवाड़ा कर रहे थे, जिससे कंपनी को 10 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है। एडीसीपी ने बताया कि मामले की जांच के लिए उबर कंपनी से संपर्क कर डेटा मांगा जाएगा ताकि ठगी की विस्तृत जानकारी सामने आ सके। पुलिस जांच में हैरान करने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपी मोबाइल ऐप्स और गूगल लेंस की मदद से आधार और ड्राइविंग लाइसेंस की फोटो एडिट करते थे। फिर इन फर्जी दस्तावेजों से उबर की IDs बनाते और रोजाना फर्जी ट्रैक्सी बुकिंग करते। सिर्फ एक महीने में ही कंपनी को 10 लाख रुपये से अधिक का नुकसान पहुंचा दिया गया।

इस मामले ने साइबर सिक्योरिटी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं — कैसे इतनी आसानी से फर्जी IDs से एक इंटरनेशनल कंपनी की सिक्योरिटी बायपास हो गई? और क्या उबर जैसी कंपनियां वेरिफिकेशन में चूक रही हैं? फिलहाल पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि यह गिरोह देश के अन्य शहरों में भी एक्टिव हो सकता है।