बैठक में शिक्षा व्यवस्था को समयानुकूल बनाना, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना तथा भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक पाठ्यक्रमों से जोड़ने पर भी विचार हुआ।
मंगलायतन विश्वविद्यालय में अकादमिक परिषद की बैठक हुई। जिसमें शैक्षणिक गुणवत्ता, नवाचार, शोध आधारित शिक्षा तथा विश्वविद्यालय के समग्र विकास को लेकर गहन मंथन किया गया। साथ में शिक्षा व्यवस्था को समयानुकूल बनाना, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना तथा भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक पाठ्यक्रमों से जोड़ने पर भी विचार हुआ।
कुलपति प्रो.पीके दशोरा ने कहा कि सभी को अपनी क्षमता, ज्ञान और प्रतिबद्धता का अधिकतम उपयोग करते हुए विश्वविद्यालय को उत्कृष्टता के शिखर तक पहुंचाने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने आगामी योजनाओं को यथार्थवादी, सकारात्मक और विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास को केंद्र में रखकर तैयार करने पर बल दिया। एएमयू के प्रो. अब्दुल्लाह बुखारी ने कहा कि यद्यपि संकाय सदस्यों द्वारा शोध पत्र प्रकाशित किए जा रहे हैं। उच्च श्रेणी के जर्नल्स में प्रकाशन से शोध की गुणवत्ता बढ़ती है, बल्कि शोधकर्ता की अकादमिक पहचान और व्यक्तित्व में भी सकारात्मक वृद्धि होती है। परीक्षा नियंत्रक प्रो. दिनेश शर्मा ने कहा कि शैक्षणिक विकास के माध्यम से विश्वविद्यालय को उत्कृष्टता का केंद्र बनाना हम सभी का सामूहिक लक्ष्य है, जिसके लिए गुणवत्ता, पारदर्शिता और निरंतर सुधार आवश्यक है।
डीन एकेडमिक प्रो. राजीव शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप अपने शैक्षणिक ढांचे में व्यापक बदलावों की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। इस दौरान वित्त सलाहकार अतुल गुप्ता, प्रो. रविकांत, प्रो आरके शर्मा, प्रो. राजेश उपाध्याय, प्रो. सौरभ कुमार, प्रो. दीपशिखा सक्सेना, प्रो. अंकुर अग्रवाल, प्रो. अशोक उपाध्याय आदि मौजूद रहे।
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